जल्द आप एटीएम से रुपए की तरह दवाएं भी निकाल सकेंगे.
अब दवाइयों के लिए भी हेल्थ एटीएम खोलने की तैयारी की जा रही है.
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ राज्य सरकारें पीपीपी मॉडल पर इस तरह के हेल्थ एटीएम स्थापित करने पर विचार कर रही हैं.
स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाला गैर सरकारी संगठन विश फाउंडेशन जल्द ही राजस्थान में एक परियोजना की शुरूआत करेगा, जिसके माध्यम से देशभर में राज्य सरकारों की साझेदारी में हेल्थ एटीएम लगाया जाएगा. विश फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौमित्र घोष ने कहा,  ‘राजस्थान में परियोजना की शुरुआत जनवरी में होगी. ओडिशा तथा मध्यप्रदेश में ऐसी ही शुरुआत के लिए बातचीत अंतिम चरण में है.’
उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देश की महत्वपूर्ण कड़ी है. हमारे पास स्वास्थ्य सेवा के लिए काम करने वाले अन्वेषकों का डेटा बेस है, जिनके विचारों को प्रयोगशाला में पूरी तरह से परीक्षण के बाद लागू किया जाएगा.’
घोष ने कहा कि पहल के तहत सर्वप्रथम सरकारों से बातचीत करना, उनकी जरूरतों की पहचान करना, उसके बाद उनकी मांग के मुताबिक नवप्रवर्तन से उन्हें अवगत कराना है. सरकारी तथा निजी क्षेत्र के 200 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नवाचारों को लाने पर चर्चा की.
विश इंडिया फाउंडेशन की पहल का उद्देश्य गरीबों को कम लागत वाले विशेष तौर पर डिजाइन किए गए ग्लूकोमीटर्स, यूरिन एनालाइजर, दूरसंचार से जुड़े हेल्थ एटीएम तथा अन्य उपकरणों का फायदा दिलाना है. भारत के वंचित वर्गो की सहायता के लिए फाउंडेशन 600 करोड़ रुपये उगाहने के लिए प्रतिबद्ध है.
आईगेट कॉरपोरेशन के सह संस्थापक तथा सह अध्यक्ष सुनील वाधवानी ने कहा, ‘इससे स्वास्थ क्षेत्र के उन 100 अन्वेषकों को मदद मिलेगी, जिनकी पहचान डेलॉइट के संयुक्त अध्ययन के दौरान किया गया था.’
वाधवानी ने कहा, ‘फंड की उगाही हमलोग करेंगे.’